Wednesday, December 21, 2011

सुदर्शन के पत्ते से बिजली बनायें ( विज्ञान मेला 2011 )

वैज्ञानिको के अनुसार अगले 40 वर्षो में पेट्रोलियम तथा २०० वर्षो में कोयला प्रथ्वी से समाप्त हो जाएगा , कोयले का उपयोग ताप विधुत घरों में किया जा रहा है / आज के युग में विधुत के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती है/ येसे में उर्जा के वैकल्पिक साधन तलाशने होंगे हो सकता है कि भविष्य में विधुत उत्पादन पेड़ पोधो से ही किया जाए
हमारे इस प्रयोग में सुदर्शन के पत्ते से बिजली से बिजली बनाई जा रही है/
Deepak & Rishabh, Class - VIII

बुलंद दरवाजा

बुलंद दरबाजा फतेहपुर सीकरी का प्रवेश द्वार कहलाता है. यह भीमकाय प्रभावशाली दरवाजा भव्य द्वार के रूप में जाना जाता है. इस दरबाजे का निर्माण सम्राट अकवर ने सन १५७३ में गुजरात पर विजय प्राप्त करने के उपलक्ष  में करवाया था . लगभग १७६ फुट ऊँचा यह दरवाजा एशिया का सबसे ऊँचा दरवाजा माना जाता है. यह स्तंभों एवं छतरी पर स्थित है. यह फतेहपुर सिकरी का सबसे अधिक महत्वपूर्ण इस्लामिक भवन है. तथा मुग़ल सम्राट की साधारण सज्जा का वर्णन करता है. कुरान की आयतों का पत्थरो पर उकेरा गया है. बाहर की तरफ नीचे लम्बी सीढ़ियाँ  प्रवेश द्वार को अतरिक्त उचाई प्रदान करती है.
Sunaina, Class - VIII
Anam, Class - VII

पदार्थो में उष्मा प्रसार

हम सभी जानते है कि सभी पदार्थ उष्मा पाकर प्रसार करते है. जब किसी ठोस , द्रव , गैस को गर्म करते है. तो उनमे प्रसार होता है. इसी प्रकार ठंडा करने पर ठोस , द्रव तथा गैस सिकुड़ते है.
कैसे पता करे कि
ठोस , द्रव तथा गैसे प्रसार करती है. ---  एक लोहे की छड़ को गर्म करते है. तो उसकी लम्बाई कुछ बढ जाती है. जिससे जुड़ा हुआ विधुत परिपथ बल्ब  को जला देता है. 

Prashant & Neeraj, Class - V

विधुत मोटर

यह एक एसी युक्ति है. जो विधुत उर्जा को यांत्रिक उर्जा में बदलते है. विधुत मोटर का उपयोग विधुत पांखों , वाशिंग मशीनो आदि में किया जाता है.
विधुत मोटर कैसे कार्य करती है.- यदि किसी कुंडली को चुम्बकीय
क्षेत्र में रखकर उसमे विधुत धारा प्रवाहित की जाये तो वह घूमने लगती है.
Beena & Swati, Class - VI

कागज में उबलता पानी..............

आमतौर पर किसी कागज को आग  पर रखने  पर जल जाता है. किन्तु इस प्रयोग के माध्यम से हम कागज में पानी उबाल कर दिखा रहे है.
क्यों नही जलता कागज --- जैसे ही कागज को उष्मा दी जाती है. तो कागज अपनी उष्मा पानी को
दे देता है इससे कागज का तापमान नही बढ  पाता है. और कागज जलने से बच जाता है.
Nidhi, Class - VI
Babli, Class - VII

चुम्बक गाडी

हमने चुम्बक से चलने वाली गाडी बनाई है. हर एक गाडी में एक  चुम्बक लगा है.चुम्बको के एक सिरे से प्रतिकर्षित करते जिसमे गाडी चलने लगती है. हर एक चुम्बक के दो सिरे होते है/ एक को उत्तरी ध्रुव और दुसरे  को  दक्षिणी ध्रुव कहते है. जब समान ध्रुव आमने सामने होते है. तो प्रतिकर्षण होता  है.और जब  असमान ध्रुव आमने - सामने हो तो आकर्षण होता है. 
Rahul, Class - VIII
Sonu , Class - IV

Save Water Save Life.

क्या करें - जितना अवश्यक हो उतना ही खर्च करें / वर्षा के जल का संग्रहण / रिवर्स बोरिंग की व्यवस्था
क्या न करें - मंजन करने के पहले या बाद में नल की टोंटी खुली न छोड़े टंकी को ओबर फ्लो न होने दे एक - एक जल बूंद संजोकर हम भविष्य को सुखद बनायें / जल की बरबादी को रोके जीवन को जीवन्त बनाये

Sandeep & Umesh,  Class - VIII

Line Follower Robot

यह मानव द्वारा बनाई गई ऑटोमेटिक मशीन है/ इसका उपयोग बड़े -बड़े कारखानों व फैक्ट्रियो में  होता है/  कारखानों व फैक्ट्रियो में एक काले रंग की रेखा बनाई जाती है/ 

Divya & Sunaina, Class - VIII

Beetle Bug Robot............

 यह एक मानवनिर्मित ऑटोमेटिक मशीन है/ इस रोबोट में दो SPDT स्विच लगे है जिसके on   और off  होने  से इनसे जुडी मोटरें on    और   off   होती है/   जिससे यह रोबोट चलता है , रुकता है, और अपनी दिशा बदलता है/ 


Saumya & Sameer, Class - VIII

अण्डा डूबेगा या तैरेगा ???

मुर्गी के अण्डे को जब सादे पानी में डालते है. तो यह डूब जाता है.लेकिन नमकीन पानी मे डालने पर नहीं डूबता है.
येसा क्यों - हम सभी जानते है कि कम घनत्व वाली वस्तुएं अधिक घनत्व वाले द्रव मे नहीं डूबती है.इसी प्रकार अधिक घनत्व बाली वस्तुएं कम घनत्व वाले द्रव में डूब जाती है.
जब पानी में नमक मिला देते है. तो पानी का घनत्व अण्डा के घनत्व से ज्यादा हो जाता है. इसी लिए अब अण्डा नहीं डूबता है.
है ना मजेदार बात !!
Pramod Kumar & Shyam Ji , Class VI

Thursday, December 1, 2011

हाइड्रोलिक मशीन

यह मशीन हाइड्रोलिक प्रेसर के सिद्धान्त पर कार्य करती है.
जब किसी सिलेंडर मे भरे द्रव पर दाब डाला जाता है. तो उतना ही दाब उससे जुड़े सिलेंडर पर पड़ता है. जिससे पिस्टन आगे की ओर खिसक जाता है. इस सिद्धान्त का उयोग हम इस मशीन की तरह कर सकते है. जिसमे कम बल लगाकर अधिक भार को उठाया जा सकता है.
अनीश, अमित क्लास - ८

Monday, October 24, 2011

कानपुर प्राणी उधान में स्वामी विवेकानंद विद्यालय लोधर की छात्रा का मेंहदी प्रतियोगिता में प्रथम स्थान..................

कानपुर प्राणी उधान में ६ अक्टूबर २०११ को  मेंहदी प्रतियोगिता में दिव्या क्लास ८ ने प्रथम स्थान प्राप्त किया.

लघु नाटिका में प्रथम स्थान...............

कानपुर प्राणी उधान में अक्टूबर २०११ को लघु नाटिका में छात्रों ने प्रथम स्थान प्राप्त किया/   जिसमे क्लास-८ से समीर,उमेश,तुलसी,शिवम. क्लास- ७ से सर्वेश ने लघु नाटिका में भाग लिया था.

Friday, September 30, 2011

LINE FOLLOWER ROBOT.


LINE AND LIGHT FOLLOWER ROBOT.


ROBOTIC WORKSHOP AT SCHOOL...................



A WORKSHOP WAS ORGANISED FOR STUDENTS OF 5  TO 8 ON 25/09/2011.
THIS WORK SHOP WAS HANDLED BY ABISEK SINGH AND HIS TEAM FROM I.I.T. KANPUR.
THEY TRAIND THE STUDENTS TO PREPARE THREE TYPES OF ROBOTS-
LIGHT  FOLLOWER ROBOT.
LINE FOLLOWER ROBOT .
BALL LIFTER ROBOT.

STUDENTS TOOK GREAT INTEREST TO LEARN MAKING ROBOT AND TO KNOW MECHANISM  OF ITS COMPONENTS .DURING THE WORKSHOP ALL THE TEACHERS CO-OPERATED . 

Tuesday, September 13, 2011

INTERNAL ORGANS OF RAT


SCIENCE ACTIVITY


Wednesday, August 24, 2011

Independence Day



Sunday, August 14, 2011

***Happy Independence Day India***

      स्वतंत्रता  संग्राम के उन  अमर शहीदों को जिन्होंने अपने खून से स्वतंत्रता की बेल को सींचा, हमारे विद्यालय परिवार एवं समस्त भारत वासियों की ओर से  सलाम
                                                                            
                                                                          (जय हिंद जय भारत)



































Friday, August 5, 2011

पुष्प की अभिलाषा

चाह नहीं मैं सुरबाला के
                  गहनों में गूँथा जाऊँ,
चाह नहीं, प्रेमी-माला में
                  बिंध प्यारी को ललचाऊँ,
चाह नहीं, सम्राटों के शव
                  पर हे हरि, डाला जाऊँ,
चाह नहीं, देवों के सिर पर
                  चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ।
मुझे तोड़ लेना वनमाली!
                  उस पथ पर देना तुम फेंक,
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने
                  जिस पर जावें वीर अनेक

Sunday, July 31, 2011

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जीवन में जब सब कुछ एक साथ और जल्दी - जल्दी करने की इच्छा होती है , सब कुछ तेजी से पा लेने की इच्छा होती है , और हमें लगने लगता है कि दिन के चौबीस घंटे भी कम पड़ते हैं , उस समय ये बोध कथा , "काँच की बरनी और दो कप चाय" हमें याद आती है। दर्शनशास्त्र के एक प्रोफ़ेसर कक्षा में आये और उन्होंने छात्रों से कहा कि वे आज जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढाने वाले हैं ...
उन्होंने अपने साथ लाई एक काँच की बडी़ बरनी ( जार ) टेबल पर रखा और उसमें टेबल टेनिस की गेंदें डालने लगे और तब तक डालते रहे जब तक कि उसमें एक भी गेंद समाने की जगह नहीं बची... उन्होंने छात्रों से पूछा - क्या बरनी पूरी भर गई ? हाँ ... आवाज आई ...
फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने छोटे - छोटे कंकर उसमें भरने शुरु किये धीरे - धीरे बरनी को हिलाया तो काफ़ी सारे कंकर उसमें जहाँ जगह खाली थी , समा गये , फ़िर से प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्या अब बरनी भर गई है, छात्रों ने एक बार फ़िर हाँ ... कहा
अब प्रोफ़ेसर साहब ने रेत की थैली से हौले - हौले उस बरनी में रेत डालना शुरु किया , वह रेत भी उस जार में जहाँ संभव था बैठ गई, अब छात्र अपनी नादानी पर हँसे... फ़िर प्रोफ़ेसर साहब ने पूछा , क्यों अब तो यह बरनी पूरी भर गई ना ? हाँ? अब तो पूरी भर गई है .. सभी ने एक स्वर में कहा ..
सर ने टेबल के नीचे से चाय के दो कप निकालकर उसमें की चाय जार में डाली , चाय भी रेत के बीच स्थित थोडी़ सी जगह में सोख ली गई ...
प्रोफ़ेसर साहब ने गंभीर आवाज में समझाना शुरु किया ?
इस काँच की बरनी को तुम लोग अपना जीवन समझो ....टेबल टेनिस की गेंदें सबसे महत्वपूर्ण भाग अर्थात भगवान, परिवार, बच्चे, मित्र , स्वास्थ्य और शौक हैं, छोटे कंकर मतलब तुम्हारी नौकरी, कार, बडा़ मकान आदि हैं और रेत का मतलब और भी छोटी - छोटी बेकार सी बातें, मनमुटाव, झगडे़ है?
अब यदि तुमने काँच की बरनी में सबसे पहले रेत भरी होती तो टेबल टेनिस की गेंदों और कंकरों के लिये जगह ही नहीं बचती, या कंकर भर दिये होते तो गेंदें नहीं भर पाते, रेत जरूर आ सकती थी..

ठीक यही बात जीवन पर लागू होती है ...
यदि तुम छोटी - छोटी बातों के पीछे पडे़ रहोगे और अपनी ऊर्जा उसमें नष्ट करोगे तो तुम्हारे पास मुख्य बातों के लिये अधिक समय नहीं रहेगा ... मन के सुख के लिये क्या जरूरी है ये तुम्हें तय करना है ।
अपने बच्चों के साथ खेलो, बगीचे में पानी डालो, सुबह पत्नी के साथ घूमने निकल जाओ, घर के बेकार सामान को बाहर निकाल फ़ेंको, मेडिकल चेक - अप करवाओ ... टेबल टेनिस गेंदों की फ़िक्र पहले करो, वही महत्वपूर्ण है... पहले तय करो कि क्या जरूरी है... बाकी सब तो रेत है....

छात्र बडे़ ध्यान से सुन रहे थे .. अचानक एक ने पूछा
, सर लेकिन आपने यह नहीं बताया कि "चाय के दो कप" क्या हैं ? प्रोफ़ेसर मुस्कुराये, बोले.. मैं सोच ही रहा था कि अभी तक ये सवाल किसी ने क्यों नहीं किया... इसका उत्तर यह है कि, जीवन हमें कितना ही परिपूर्ण और संतुष्ट लगे, लेकिन अपने खास मित्र के साथ दो कप चाय पीने की जगह हमेशा होनी चाहिये।

(
अपने खास मित्रों और निकट के व्यक्तियों को यह विचार तत्काल बाँट दो .. मैंने अभी - अभी यही किया है)

Saturday, July 23, 2011

कारीगर चिड़िया


हमारे स्कूल में ईटों  से बने घेरे में एक बरगद का पेंड़  है .एक दिन सवेरे मैने बरगद के पत्ते पर रखे हुये दो अंडे देखे . नीले रंग के . दो पत्तों  को जोड़ कर  बड़ी कारीगरी से बना है यह घोसला .दोनों पत्तों के किनारों को बिल्कुल वैसे ही सिला है जैसे कोई मोची समान दूरियों पर फंदे लगाता हो. ऊपर के पत्ते को इस प्रकार मोड़ा गया है . जैसे बंजारे गोल त वाले घर बनाते हैं . अंदर कुछ मुलायम  चीजे रुई जैसा कुछ रखा हुआ है .चिड़िया ने  बड़ी मसक्कत से यह घोसला तैयार किया है .लेकिन आज तक वह चिड़िया दिखी नहीं .कहीं  वह अनाथालय में अपने अण्डे  छोड़ कर  तो  नहीं चली गई !

Friday, July 22, 2011

VISITER’S IN SCHOOL


Dr. Ganapati Ayappa of IISC, Banglore  and Dr. V. Shankar of I.I.T. Kanpur Visited the School on 15th july  2011.
COMMENTS-  Wonderful School and Commited         Teacher’s (Dr. G. Ayappa)
Great school & excellent staff .  my best wishes to the student’s .   

Monday, July 4, 2011

TEACHER’S TRAINING-2011


This year Mr. Brajesh Kumar and Mr. Sadan Singh went to participate in Teacher’s Training in Indore.
The training was for 6 days .they came to know many minor techniques about microscope. They learnt a deep knowledge about heat, temperature, use of microscope and staining and electricity. The experience was very excellent. They learned  so many things by doing them selves . Except this all participants shared their ideas and enjoyed the science..............

Wednesday, June 29, 2011


Saturday, April 30, 2011

FAREWELL 2011

Teacher's and Student's..................................

FAREWELL 2011


Saturday, April 23, 2011

KHIL KHIL

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